हिंदी फ़िल्मी दुनिया की कुछ दिलचस्प और अनसुनी सच्चाइयां: क्या आप जानते हैं? (Music Trivia & Quiz)
हिंदी सिनेमा और बॉलीवुड संगीत का इतिहास ऐसे अनगिनत किस्सों, दिलचस्प वाकयों और अनसुने रहस्यों से भरा पड़ा है, जिन्हें जानकर हर संगीत प्रेमी हैरान रह जाता है। क्या आप खुद को बॉलीवुड संगीत का सच्चा जानकार मानते हैं? आइए, इस विशेष क्विज़-आर्टिकल के ज़रिए आपकी म्यूज़िकल नॉलेज को परखते हैं!
1. क्या आप जानते हैं कि हिंदी फ़िल्मों के किस प्रतिभाशाली संगीतकार ने कभी लता मंगेशकर से कोई गाना नहीं गवाया?
उत्तर: ओ. पी. नैयर (O.P. Nayyar) साहब।
हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और लोकप्रिय संगीतकारों में शुमार ओ. पी. नैयर साहब ने अपने पूरे करियर में कभी भी स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी की आवाज़ का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बावजूद उन्होंने आशा भोसले, गीता दत्त और मो. रफ़ी साहब के साथ एक से बढ़कर एक कालजयी और सुपरहिट धुनें रचीं।
2. किस महान संगीतकार ने बरसों तक किशोर कुमार से एक भी गीत नहीं गवाया?
उत्तर: नौशाद अली (Naushad Ali) साहब।
शास्त्रीय संगीत के महारथी नौशाद साहब अपनी धुनों के लिए मुख्य रूप से मोहम्मद रफ़ी साहब और मुकेश जी पर भरोसा करते थे। उन्होंने शुरुआत में किशोर कुमार जी की गायकी शैली को अपनी गंभीर धुनों के अनुकूल नहीं माना। हालाँकि, बाद में आगे चलकर उन्होंने फ़िल्म ‘सुनहरा संसार’ के लिए किशोर कुमार से सिर्फ एक गीत गवाया था जो आशा भोसले जी के साथ एक युगल गीत था. मगर दिलचस्प बात ये भी रही कि वो गाना किसी कारणवश पिक्चर में शामिल नहीं हो सका, मगर उसका रिकॉर्ड बन गया था. आप ये गाना सर्च करके सुन सकते हैं. गाने के बोल हैः Hello Hello Kya Haal Hai.
3. वो कौन से दिग्गज संगीतकार और गायक हैं, जिन्होंने हिंदी फ़िल्मों में एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए, लेकिन उनके गानों को किसी भी हीरो या कैरेक्टर द्वारा गाते हुए नहीं दिखाया गया, यानी किसी भी किरदार ने उनके गानों की लिपसिंक (Lip-sync) नहीं की?
उत्तर: सचिन देव बर्मन (S.D. Burman / दादा)।
लोकप्रिय संगीतकार एस.डी. बर्मन साहब की आवाज़ में एक अजीब सी कशिश थी और एक अलग सा रूहानी खिंचाव था। उन्होंने फ़िल्म ‘सुजाता’ (सुन मेरे बंधु रे), ‘गाइड’ (वहाँ कौन है तेरा), और ‘अराधना’ (सफ़ल होगी तेरी आराधना) जैसे अनगिनत न भूलने वाले गाने गाए। लेकिन दादा का नियम था कि उनके गाए गाने केवल फ़िल्म के बैकग्राउंड में या सिचुएशन के हिसाब से बजेंगे — पर्दे पर कोई भी हीरो उनके गानों पर होंठ नहीं हिलाएगा।
4. क्या आप जानते हैं कि मदन मोहन जी के अमर गाने ‘लग जा गले‘ को शुरुआत में फ़िल्म के डायरेक्टर ने रिजेक्ट कर दिया था?
उत्तर: जी हाँ, यह बिल्कुल सच है!
फ़िल्म ‘वो कौन थी’ के निर्देशक राज खोसला जी को जब मदन मोहन जी ने पहली बार यह धुन सुनाई, तो उन्हें यह पसंद नहीं आई और उन्होंने इसे हटाने को कह दिया। लेकिन मदन मोहन जी और मनोज कुमार जी के कहने पर इसे दोबारा सुना गया और फ़िल्म में शामिल किया गया। आज यह गाना भारतीय संगीत के इतिहास का बेहद पसंदीदा रोमांटिक, बार बार गाया जाने वाला और सबसे महबूब नग़मों में से एक माना जाता है। इस अमर गीत को लिखा था, राजा मेहदी अली ख़ान ने.
5. आर.डी. बर्मन (पंचम दा) ने किन मशहूर गानों की धुनों की तैयारी में ‘सोडा वॉटर‘ की बोतलों और उनके ढक्कनों का इस्तेमाल किया था?
उत्तर: ‘महबूबा महबूबा’ (फ़िल्म: शोले) और ‘ओ माझी रे’ (फ़िल्म ख़ुशबू)
6. सम्मान के साथ ट्रेजिडी किंग और Thespian के नाम से याद किए जाने वाले शानदार अभिनेता दिलीप कुमार (यूसुफ़ ख़ान) ने किस फिल्म में अपने ऊपर फिल्माया गाना खुद गाया था?
उत्तरः फ़िल्म ‘मुसाफ़िर’ में उन्होंने महीनों के रियाज़ के बाद एक गाना ख़ुद अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किया था और महान गायिका लता मंगेशकर के साथ ये एक युगल गीत था. गाने के बोल थे, लागी नाही छूटे राम.
7. वो कौनसे एकमात्र हिंदी फ़िल्मों के गायक हैं जो मेल और फ़ीमेल यानी पुरुष और महिला दोनों आवाज़ों में गाना गा सकते हैं और रिकॉर्ड करके फिल्म में इस्तेमाल भी कर सकते हैं?
उत्तरः किशोर कुमार. उनका गाना ‘आ के सीधी लगी दिल पे’ वो गाना था जिसमें पुरुष और महिला दोनों की आवाज़ों का इस्तेमाल होना था, और ये दोनों आवाज़ें किशोर कुमार जी ने खुद ही निकाली थीं. Film: Half Ticket – 1962
भारतीय फ़िल्मी संगीत केवल सुरों और ताल का मेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे लगन, ज़िद और अनगिनत इंसानी किस्सों की एक समृद्ध दुनिया बसी हुई है।
क्या आपको भी कोई ऐसा अनसुना फैक्ट याद आ रहा है?